वनों की अवैध कटाई, भ्रष्टाचार और वन माफियाओं से मिलीभगत के गंभीर आरोप

🌲 जंगल की लूट पर बड़ी कार्रवाई!

केवलारी : लंबे समय से वन माफियाओं से सांठगांठ और अवैध कटाई के आरोपों में घिरे केवलारी रेंजर अमित सोनी को आखिरकार वन विभाग ने निलंबित कर दिया है। सिवनी वन वृत्त द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अवैध रूप से सागौन के पेड़ों की कटाई और वन्य संपदा की लूट में लिप्त पाए जाने के कारण यह कार्रवाई की गई है।


निलंबन की बड़ी वजहें

✔ अवैध लकड़ी कटाई – सैकड़ों सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई।
✔ वन माफियाओं से गठजोड़ – संरक्षण के आरोप।
✔ पर्याप्त कार्रवाई न करने का आरोप – जांच के बावजूद लचर रवैया।

⚖️ एसडीओ पर भी गिर सकती है गाज!

सिर्फ रेंजर ही नहीं, बल्कि एसडीओ आर के गुरुदेव पर भी कार्रवाई संभव! वन विभाग की जांच रिपोर्ट में एसडीओ स्तर के अधिकारियों की लापरवाही भी उजागर हुई है।
सूत्रों के अनुसार:
▶ एसडीओ ने लापरवाही बरती, अवैध कटाई पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
▶ संबंधित वन कर्मियों को समय रहते नहीं रोका गया।
▶ रेंजर अमित सोनी पर आरोप लगने के बावजूद, वरिष्ठ अधिकारी कार्रवाई से बचते रहे।
🌿 वन विभाग भोपाल का कड़ा रुख – अपराधियों को नहीं मिलेगी राहत!

✅ भोपाल मुख्यालय ने भ्रष्टाचार पर सख्ती दिखाते हुए लिया ऐतिहासिक फैसला।
✅ वन्य संपदा की सुरक्षा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी – वन विभाग।
✅ आगे और बड़े अधिकारियों पर भी हो सकती है कार्रवाई।
सच्चाई को दबाने की कोशिश नाकाम, पत्रकारों की मुहिम ने खोली अधिकारियों की पोल

लगभग एक वर्ष पूर्व, जब वैनगंगा टाइम्स के संपादक इंजीनियर प्रवीण दुबे और देवराज डेहरिया ने केवलारी वन परिक्षेत्र में हो रही अवैध कटाई का खुलासा किया और एसडीओ गुरुदेव, डीएफओ व सीसीएफ को शिकायत सौंपी, तब अधिकारियों ने मामले को दबाने की भरसक कोशिश की। शिकायतों को नजरअंदाज कर, लीपापोती कर इसे ठंडे बस्ते में डालने का प्रयास किया गया।
लेकिन ग्रामीणों की लगातार शिकायतों और जागरूक पत्रकारों की अथक कोशिशों ने प्रशासन को झुकने पर मजबूर कर दिया। मीडिया में निरंतर खबरें प्रकाशित होने और मुख्यमंत्री तक मामला पहुंचाने के बाद आखिरकार कार्रवाई की गई। प्रमुख वन संरक्षक, भोपाल को प्रमाणों सहित शिकायत भेजने पर उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित हुई। डीएफओ गौरव मिश्रा, सहायक वन संरक्षक योगेश पटेल और डीसीएफ जितेंद्र गुप्ता सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर वन विभाग में फैले भ्रष्टाचार की परतें खोल दीं।
बेखौफ होकर सच सामने लाने वाले पत्रकारों की भूमिका सराहनीय

केवलारी वन परिक्षेत्र में सागौन की अवैध कटाई और तस्करी का मामला सामने लाने में वैनगंगा टाइम्स के संपादक इंजीनियर प्रवीण दुबे, वरिष्ठ पत्रकार देवराज डेहरिया, श्रमजीवी पत्रकार संघ केवलारी के अध्यक्ष रफीक खान, पत्रकार आदिल खान, समाजसेवी पवन यादव, पत्रकार स्वप्निल उपाध्याय और पत्रकार कृष्ण कुमार प्रजापति सहित अन्य पत्रकार साथियों की निडर पत्रकारिता ने अहम भूमिका निभाई।

इन पत्रकारों ने न केवल इस घोटाले को उजागर किया, बल्कि प्रतिदिन भोपाल से आए जांच दल के साथ मौके पर पहुंचकर जांच को पारदर्शी बनाने का काम किया। निरंतर समाचार प्रकाशन और प्रशासन पर दबाव बनाने के कारण ही यह मामला बड़े स्तर पर जांच के दायरे में आया। इनके प्रयासों से ही सरकार और वन विभाग को सख्त कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ा।
पत्रकारों की सतर्कता और साहसिक रिपोर्टिंग ने यह साबित कर दिया कि जब सच के पक्ष में कलम उठती है, तो भ्रष्टाचार और मिलीभगत के खेल को बेनकाब होने से कोई नहीं रोक सकता। निश्चित ही ये सभी पत्रकार प्रशंसा और सम्मान के हकदार हैं।
अब देखना यह होगा कि एसडीओ समेत अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर कब तक कार्रवाई होती है। वन मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही विभागीय जांच आगे बढ़ेगी और जिम्मेदार अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है।