🌳 केवलारी में जंगल पर माफियाओं का कब्जा! प्रशासन की चुप्पी संदिग्ध 🌳

🌳 कौन है जिम्मेदार? प्रशासन की लापरवाही या माफियाओं की मिलीभगत?🌳

🌳अधिकारियों की अनदेखी से हरे-भरे पेड़ों का हो रहा कत्लेआम🌳

🌳क्या होगी दोषियों पर सख्त कार्रवाई या मामला फाइलों में दब जाएगा?🌳

🌳केवलारी के ग्राम दुरेंदा में खुलेआम कटे सैकड़ों पेड़, प्रशासन बना मूकदर्शक!🌳

✅ 400 से अधिक सागौन, बीजा, साज, महुआ, आम, कौहा के ठूंठ मिले
✅ मीडिया रिपोर्टिंग के बाद हरकत में आया प्रशासन, मौके पर पहुंची जांच टीम
✅ राजनीतिक संरक्षण में वन माफिया – जनपद उपाध्यक्ष के बेटों पर गंभीर आरोप
✅ पटवारी की संदिग्ध भूमिका – मिलीभगत या महज लापरवाही?
केवलारी। इन दिनों केवलारी अनुविभाग में जंगलों की अंधाधुंध कटाई और वन माफियाओं के बढ़ते प्रभाव ने पर्यावरण को गंभीर संकट में डाल दिया है। अवैध रूप से पेड़ों की कटाई न केवल जैव विविधता को खत्म कर रही है, बल्कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन को भी तेजी से बढ़ा रही है। जंगलों के विनाश से वायु प्रदूषण बढ़ रहा है, वन माफियाओं द्वारा जंगलों की बेतहाशा कटाई न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन रही है। तेजी से घटते जंगलों के कारण ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है, जिससे जलवायु असंतुलन, असामान्य मौसम परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाएं आम हो गई हैं। यदि समय रहते वन माफियाओं पर नकेल नहीं कसी गई और जंगलों का संरक्षण नहीं किया गया, तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक गंभीर पर्यावरणीय संकट बन सकता है। सरकार और प्रशासन को वन माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए और जंगलों को बचाने के लिए सख्त कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करना चाहिए। आम नागरिकों को भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होना होगा, क्योंकि यदि जंगल नष्ट होते रहे, तो मानव जीवन भी संकट में पड़ जाएगा।
🌱 पर्यावरण की हत्या – केवलारी की धरती से मिटती हरियाली!

उगली के पांडिया छपारा के समीप ग्राम दुरेंदा में राजस्व भूमि पर लगे वर्षों पुराने हरे-भरे पेड़ों को वन माफियाओं ने बेखौफ काट डाला। गुपचुप तरीके से की गई इस कटाई के बाद लकड़ी का तस्करी कर परिवहन भी कर लिया गया। लेकिन यहां पदस्थ हल्का पटवारी डिलेंद्र गौतम ने कोई सूचना अपने उच्च अधिकारियों को नहीं दी। अब सवाल यह उठता है कि यह अनदेखी लापरवाही थी या मिलीभगत?
🚨 मामला मीडिया में आने के बाद जागा प्रशासन!

पत्रकारों ने जब इस अवैध कटाई की पड़ताल कर केवलारी एसडीएम महेश अग्रवाल को शिकायत की, तब जाकर प्रशासन हरकत में आया। उन्होंने दो नायब तहसीलदारों और पटवारियों की टीम बनाकर मौके पर निरीक्षण करवाया, जहां 400 से अधिक कटे हुए पेड़ों के ठूंठ मिले।
“महेश अग्रवाल, अनुविभागीय अधिकारी केवलारी”
🔎 स्थानीय ग्रामीणों का आरोप

इस अवैध कटाई में जनपद पंचायत केवलारी की उपाध्यक्ष के बेटे नरेश चौधरी और आशीष चौधरी की संलिप्तता बताई जा रही है। वन माफियाओं के साथ इन राजनीतिक रसूखदारों ने मिलकर हजारों पेड़ों का कत्लेआम किया और लाखों की लकड़ी तस्करी कर डाली।
❓पटवारी की भूमिका पर सवाल – आखिर इतनी बड़ी कटाई कैसे छिपी रही?

हल्का पटवारी डिलेंद्र गौतम की चुप्पी ने प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, पटवारी को सब पता था, लेकिन उसने कोई कदम नहीं उठाया। इतनी बड़ी अवैध कटाई के बावजूद उसका मौन रहना साफ तौर पर मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
📢 प्रशासन कब तक रहेगा मौन?

पर्यावरण प्रेमियों और समाजसेवियों का कहना है कि यह अवैध कटाई बिना प्रशासन की मिलीभगत के संभव नहीं थी। वन माफिया लंबे समय से सक्रिय हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।
क्या बोले जिम्मेदार अधिकारी?
🔴 नायब तहसीलदार दामोदर दुबे का बयान:
“हमने मौके पर पहुंचकर जांच की है। दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी और अवैध रूप से काटे गए पेड़ों की भरपाई की जाएगी।”
🌏 बड़ा सवाल – क्या दोषियों को मिलेगी सजा या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?