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वन परिक्षेत्र केवलारी: अवैध सागौन कटाई के मामले में रेंजर अमित सोनी पर गंभीर आरोप

◆रेंजर अमित सोनी: वन संरक्षण का जिम्मेदार या अवैध कटाई का सूत्रधार?
◆क्या रेंजर अमित सोनी ही अवैध कटाई का मास्टरमाइंड? जांच को गुमराह करने की साजिश बेनकाब
◆रेंजर की संदेहास्पद भूमिका! जांच के दौरान क्यों छिपाए जा रहे अवैध कटाई के सबूत?
◆क्या केवलारी का जंगल रेंजर के इशारे पर उजड़ रहा है? अवैध कटाई मामले में लीपा-पोती जारी!
◆पंचनामे में हेरफेर, कटे ठूंठों पर फर्जी निशान! रेंजर अमित सोनी के कारनामों का पर्दाफाश
◆सवालों के घेरे में केवलारी रेंजर, जांच में लगातार सामने आ रहे हैं चौंकाने वाले खुलासे
◆अवैध कटाई को छिपाने के लिए रेंजर अमित सोनी का षड्यंत्र उजागर
◆जांच को गुमराह करने और पंचनामा में छेड़छाड़ के आरोपों से घिरे रेंजर अमित सोनी

केवलारी। वन परिक्षेत्र केवलारी में बेशकीमती सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई और तस्करी का मामला अब वन विभाग के लिए सिरदर्द बन चुका है। प्रदेश एवं जिला स्तर के अधिकारियों की निगरानी में चल रही जांच में चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। आरोप हैं कि केवलारी वन परिक्षेत्र के रेंजर अमित सोनी न केवल जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं, बल्कि अवैध कटाई के प्रमाणों को छिपाने के लिए लीपा-पोती में भी जुटे हुए हैं। जांच के दौरान सामने आए नए साक्ष्य बताते हैं कि केवलारी वन परिक्षेत्र के रेंजर अमित सोनी इस अवैध कटाई का हिस्सा हैं और इसे छिपाने के लिए जांच को गुमराह करने की साजिश रच रहे हैं।

जांच को गुमराह करने का खेल!

सूत्रों के अनुसार, अलग-अलग बीटों में चार जांच दलों का गठन किया गया था। जब जांच अधिकारियों ने कुछ दिनों पहले कटे हुए सागौन के ठूंठों की पड़ताल की, तब उन पर किसी भी प्रकार का सरकारी निशान नहीं था। लेकिन अब अचानक उन्हीं ठूंठों पर पी.ओ.आर. (पोलिसी ऑफिशियल रिपोर्ट) और हैमर अंकित किए जाने से स्पष्ट होता है कि अवैध कटाई को वैध साबित करने की कोशिश की जा रही है। सवाल उठता है कि ये सरकारी निशान आखिर रातों-रात कहां से आ गए?

वन परिक्षेत्र में अनुपस्थित बीट गार्ड: महज संयोग या सुनियोजित साजिश?

जांच दल के अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान संबंधित बीट गार्ड और डिप्टी रेंजर अक्सर अनुपस्थित रहते हैं, जिससे कटे हुए पेड़ों का सही रिकॉर्ड नहीं मिल पा रहा। यह रेंजर अमित सोनी की मिलीभगत की ओर इशारा करता है, क्योंकि सटीक जानकारी न मिलने से अवैध कटाई को छिपाना आसान हो जाता है।

पंचनामे में छेड़छाड़ के आरोप: जांच दल को धोखा देने की कोशिश

जांच दल के अधिकारियों और शिकायतकर्ताओं द्वारा हस्ताक्षरित पंचनामों में भी छेड़छाड़ के आरोप सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि जांच अधिकारियों की अनुपस्थिति में इन दस्तावेजों को निकालकर उनमें बदलाव किए गए। यह न केवल जांच की निष्पक्षता को प्रभावित करने वाला है, बल्कि इसमें वन परिक्षेत्र के अधिकारियों की संलिप्तता भी उजागर होती है।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पहले से ही यह आशंका थी कि केवलारी वन परिक्षेत्र में निष्पक्ष जांच को प्रभावित करने का प्रयास किया जाएगा। अब जो प्रमाण सामने आ रहे हैं, वे इस ओर इशारा कर रहे हैं कि रेंजर अमित सोनी की भूमिका संदिग्ध है और उच्च अधिकारियों को इस पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

रेंजर अमित सोनी पर क्यों न हो कड़ी कार्रवाई?

शिकायतकर्ताओं और जांच दल के अधिकारियों का कहना है कि केवलारी वन परिक्षेत्र में निष्पक्ष जांच को प्रभावित करने के लिए कई तरह की चालें चली जा रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर रेंजर अमित सोनी को किसका संरक्षण प्राप्त है, जो उनके खिलाफ अभी तक कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया?

वन विभाग को चाहिए कि इस पूरे मामले की सम्पूर्ण जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई हो, ताकि केवलारी की कीमती वन संपदा को नष्ट होने से बचाया जा सके।

वन विभाग को सख्त कदम उठाने की जरूरत

इस पूरे मामले को देखते हुए यह आवश्यक हो गया है कि वन विभाग निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे। जांच प्रभावित करने की कोशिशों को रोकने के लिए सख्त निगरानी और जवाबदेही तय की जानी चाहिए, ताकि अवैध कटाई के दोषियों पर उचित कार्रवाई हो सके।

Devraj Dehariya

Devraj Dehariya

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