केवलारी वन परिक्षेत्र में अवैध कटाई का मामला, उच्च स्तरीय जांच के बाद कार्रवाई

वन परिक्षेत्र में अवैध कटाई पर बढ़ी सख्ती, उच्च अधिकारियों पर भी लटक रही तलवार

केवलारी। सिवनी जिले के केवलारी वन परिक्षेत्र में सागौन की अवैध कटाई के मामले में अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई देखने को मिल रही है। दो डिप्टी रेंजरों को निलंबित करने के बाद अब रेंजर अमित सोनी और एसडीओ डॉ. आर.के. गुरुदेव पर भी कार्रवाई की संभावना तेज हो गई है। जांच में स्पष्ट हुआ है कि विभागीय मिलीभगत से वन माफियाओं ने जंगलों को उजाड़ दिया, जिससे अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है।
शिकायत के बाद बड़ी जांच, सामने आए चौंकाने वाले खुलासे

सच्चाई को दबाने की कोशिश नाकाम, पत्रकारों की मुहिम ने खोली अधिकारियों की पोल

लगभग एक वर्ष पूर्व, जब वैनगंगा टाइम्स के संपादक इंजीनियर प्रवीण दुबे और देवराज डेहरिया ने केवलारी वन परिक्षेत्र में हो रही अवैध कटाई का खुलासा किया और एसडीओ गुरुदेव, डीएफओ व सीसीएफ को शिकायत सौंपी, तब अधिकारियों ने मामले को दबाने की भरसक कोशिश की। शिकायतों को नजरअंदाज कर, लीपापोती कर इसे ठंडे बस्ते में डालने का प्रयास किया गया।
लेकिन ग्रामीणों की लगातार शिकायतों और जागरूक पत्रकारों की अथक कोशिशों ने प्रशासन को झुकने पर मजबूर कर दिया। मीडिया में निरंतर खबरें प्रकाशित होने और मुख्यमंत्री तक मामला पहुंचाने के बाद आखिरकार कार्रवाई की गई। प्रमुख वन संरक्षक, भोपाल को प्रमाणों सहित शिकायत भेजने पर उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित हुई। डीएफओ गौरव मिश्रा, सहायक वन संरक्षक योगेश पटेल और डीसीएफ जितेंद्र गुप्ता सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर वन विभाग में फैले भ्रष्टाचार की परतें खोल दीं।
इस कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया कि सच्चाई को ज्यादा देर तक दबाया नहीं जा सकता और निष्पक्ष पत्रकारिता आज भी बदलाव लाने में सक्षम है।
पत्रकारों की निडरता से उजागर हुआ सागौन तस्करी का बड़ा खेल

बेखौफ होकर सच सामने लाने वाले पत्रकारों की भूमिका सराहनीय

केवलारी वन परिक्षेत्र में सागौन की अवैध कटाई और तस्करी का मामला सामने लाने में वैनगंगा टाइम्स के संपादक इंजीनियर प्रवीण दुबे, वरिष्ठ पत्रकार देवराज डेहरिया, श्रमजीवी पत्रकार संघ केवलारी के अध्यक्ष रफीक खान, पत्रकार स्वप्निल उपाध्याय और पत्रकार कृष्ण कुमार प्रजापति की निडर पत्रकारिता ने अहम भूमिका निभाई।
इन पत्रकारों ने न केवल इस घोटाले को उजागर किया, बल्कि प्रतिदिन भोपाल से आए जांच दल के साथ मौके पर पहुंचकर जांच को पारदर्शी बनाने का काम किया। निरंतर समाचार प्रकाशन और प्रशासन पर दबाव बनाने के कारण ही यह मामला बड़े स्तर पर जांच के दायरे में आया। इनके प्रयासों से ही सरकार और वन विभाग को सख्त कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ा।
पत्रकारों की सतर्कता और साहसिक रिपोर्टिंग ने यह साबित कर दिया कि जब सच के पक्ष में कलम उठती है, तो भ्रष्टाचार और मिलीभगत के खेल को बेनकाब होने से कोई नहीं रोक सकता। निश्चित ही ये सभी पत्रकार प्रशंसा और सम्मान के हकदार हैं।
जांच के दौरान जो खुलासे हुए, वे बेहद चौंकाने वाले थे—
✔ 150 से अधिक सागौन की अवैध कटाई हो चुकी है।
✔ वन माफियाओं ने रेंजर और एसडीओ की मिलीभगत से हरे-भरे सागौन के जंगलों को काट डाला।
✔ सैकड़ों की संख्या में कटे हुए पेड़ों के ठूंठ और भारी मात्रा में वन उपज जब्त की गई।
✔ वन परिक्षेत्र अधिकारियों और कर्मचारियों ने सुरक्षा की जिम्मेदारी नहीं निभाई।
रेंजर और एसडीओ की भूमिका संदिग्ध, हो सकती है निलंबन की कार्रवाई

अब तक की जांच में केवलारी रेंजर अमित सोनी और एसडीओ डॉ. आर.के. गुरुदेव की भूमिका सबसे अधिक संदिग्ध पाई गई है। सूत्रों का कहना है कि वन माफियाओं की मदद से इन अधिकारियों के संरक्षण में लंबे समय से अवैध कटाई चल रही थी।
सिवनी दक्षिण वन मंडल अधिकारी गौरव मिश्रा ने कहा,
“वन परिक्षेत्र केवलारी में भारी पैमाने पर हुई अवैध कटाई में जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही स्पष्ट रूप से सामने आई है। जांच प्रतिवेदन भोपाल भेजा गया है, और अब उच्च अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश की गई है।”
अब तक की कार्रवाई:
✅ 31 जनवरी 2025: तीन वनरक्षक निलंबित।
✅ 5 फरवरी 2025: दो डिप्टी रेंजर निलंबित।
✅ आगे: रेंजर अमित सोनी और एसडीओ डॉ. आर.के. गुरुदेव पर जल्द हो सकती है कार्रवाई।
क्या होगी अगली कार्रवाई?
जांच रिपोर्ट भोपाल भेजी जा चुकी है, और जल्द ही उच्च अधिकारियों से अंतिम आदेश मिलने की संभावना है। अगर प्रतिवेदन के आधार पर निर्णय लिया गया, तो केवलारी रेंजर अमित सोनी और एसडीओ डॉ. आर.के. गुरुदेव पर भी निलंबन की तलवार लटक सकती है।
इस पूरे मामले ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होगी, या फिर मामला दबा दिया जाएगा? अब सभी की नजरें भोपाल मुख्यालय के फैसले पर टिकी हैं।